महासागर, बर्फ के पहाड़, धरती का पर्यावरण और धरती की सतह का नियमित रूप से गर्म होने की प्रक्रिया को global warming कहते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक तौर पर वातावरणीय तापमान में बढ़ोतरी हुई है।
1983,1987,1988,1989 और 1991 इन वर्षों में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई है।

ग्लोबल वार्मिंग और इसके कारण क्या हैं?

वैसे तो global warming के बहुत से कारण हैं पर इसका मुख्य कारण greenhouse gas है जो कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तो कुछ इंसानों द्वारा पैदा किया जाता है।

क्या है ग्रीनहाउस गैस 

Greenhouse gas मतलब कि कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस को मिलाकर ग्रीनहाउस गैस बनता है।

क्या है ग्रीनहाउस के प्रभाव?

ग्रीन हाउस का सीधा प्रभाव समुद्र जलस्तर बढ़ना, बड़े-बड़े बर्फ के पहाड़ों का पिघलना और वायुमंडल में परिवर्तन होना यह सब ग्रीन हाउस गैस के कारण होता है।

अभी हमने ग्रीन हाउस गैस के बारे में जाना जो मिथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को मिलाकर बनता है यानी हम यह भी कह सकते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड और मिथेन ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।

क्या हैं कार्बन डाइऑक्साइड?

कार्बन डाइऑक्साइड एक रंगहिन तथा गंधहीन गैस जो पृथ्वी पर जीवन के लिए अति आवश्यक है पर इस गैस का परिणाम कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है क्योंकि इंसानों की जनसंख्या बढ़ रही है इसलिए इस गैस का परिमाण बढ़ रहा है।

यह गैस को पृथ्वी के सभी सजीव स्वसन क्रिया के समय त्याग करते हैं और पेड़ पौधे ग्रहण करते हैं।

मीथेन गैस क्या है और मीथेन के बारे में जानें?

मिथेन गैस भी रंगहीन तथा गंधनीय गैस है जैसे कार्बन डाइऑक्साइड है, मिथेन जमीन के नीचे और समुद्र तल के नीचे पाया जाता है।

मिथेन गैस की खोज सबसे पहले नवंबर 1776 में इटली और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक अलेसांद्रो वोल्टा(Alessandro Volta) ने की थी।

उन्होंने मेगीओरी झील के दलदल में इस गैस की पहचान की थी।

मीथेन गैस का नाम “मिथेन” जर्मन के रसायन वैज्ञानिक “विल्हेम वान हॉफमैन(Wilhelm Van Hofmann)” द्वारा अगस्त 1866 में मीथेन गैस का नाम दिया गया।

मीथेन गैस का उपयोग आग पैदा करने के लिए होता है जैसे कि oven, वाटर हीटर, भट्टी में तथा ऑटोमोबाइल में मीथेन गैस का उपयोग किया जाता है, और साथ ही में घरों में उपयोग होने वाले गैस के सिलेंडरों में भी मिथेन का ही उपयोग होता है और गाड़ी में हम जो सीएनजी डालते हैं उसे हम मिथेन गैस भी कह सकते हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में कैसे योगदान देता है?

दरअसल सूर्य से आने वाली किरणों को तो यह गैसे पृथ्वी की सतह तक पहुंचने देती हैं, परंतु पृथ्वी की गर्मी जब सूर्य ढलने के बाद अंतरिक्ष में जाना चाहती हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड और मिथेन उसे रोकती हैं। यानी कि पृथ्वी की गर्मी को रोकती है, इसलिए पृथ्वी पर गर्मी बढ जाती है जिसे global warming कहते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम पर क्या प्रभाव पड़ता है?

वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि पृथ्वी के बढ़ते तापमान लंबे समय तक गर्म कर रहे हैं और गर्मी की लहरें, अधिक लगातार सूखा, भारी वर्षा और अधिक शक्तिशाली तूफान हैं। उदाहरण के लिए, 2015 में, वैज्ञानिकों ने कहा कि 1,200 वर्षों में कैलिफ़ोर्निया में जारी सूखा – राज्य की सबसे खराब पानी की कमी, ग्लोबल वार्मिंग द्वारा 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक तीव्र हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में होने वाले इसी तरह के सूखे की संभावनाएं पिछली सदी में लगभग दोगुनी हो गई थीं। और 2016 में, विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिसिन की राष्ट्रीय अकादमियों ने घोषणा की कि जलवायु परिवर्तन पर सीधे कुछ गर्मी की लहरों की तरह, निश्चित रूप से कुछ मौसम की घटनाओं को विशेषता देना संभव है।

पृथ्वी के महासागरीय तापमान भी गर्म हो रहे हैं, जिसका अर्थ है कि उष्णकटिबंधीय तूफान अधिक ऊर्जा उठा सकते हैं। इसलिए ग्लोबल वार्मिंग एक खतरनाक श्रेणी 4 तूफान में श्रेणी 3 तूफान को बदल सकती है। वास्तव में, वैज्ञानिकों ने पाया है कि उत्तरी अटलांटिक तूफान की आवृत्ति 1980 के दशक के बाद से बढ़ी है, साथ ही तूफान की संख्या जो 4 और 5 श्रेणियों में पहुंचती है। 2005 में, तूफान कैटरीना – अमेरिकी इतिहास में सबसे महंगा तूफान – न्यू ऑरलियन्स ; दूसरा सबसे महंगा, तूफान सैंडी, 2012 में ईस्ट कोस्ट से टकराया था।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। अत्यधिक गर्मी की लहरों ने हाल के वर्षों में दुनिया भर में हजारों मौतें की हैं। और आने वाली घटनाओं के एक खतरनाक संकेत में, अंटार्कटिका 2002 के बाद से प्रति वर्ष लगभग 134 बिलियन मीट्रिक टन बर्फ खो रहा है। यदि हम अपनी वर्तमान गति से जीवाश्म ईंधन जलाते रहें तो यह दर बढ़ सकती है, कुछ विशेषज्ञों का कहना है, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ जाता है। अगले 50 से 150 वर्षों में कई मीटर बढ़े।

ग्लोबल वार्मिंग के अन्य प्रभाव क्या हैं?

हर साल, वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों के बारे में अधिक सीखते हैं, और बहुत से लोग इस बात से सहमत हैं कि पर्यावरणीय, आर्थिक, और स्वास्थ्य परिणाम होने की संभावना है अगर कोई रुझान जारी रहता है। यहाँ हम क्या करने के लिए तत्पर कर सकते हैं की एक बात है:

पिघलते ग्लेशियर, शुरुआती हिमपात और गंभीर सूखे के कारण पानी की अधिक नाटकीय कमी होगी और अमेरिकी पश्चिम में जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाएगा।

समुद्री जल स्तर बढ़ने से पूर्वी सीबोर्ड पर तटीय बाढ़ आएगी, विशेष रूप से फ्लोरिडा में, और अन्य क्षेत्रों जैसे मेक्सिको की खाड़ी में।

जंगलों, खेतों और शहरों में परेशानी का सामना करना पड़ेगा नए कीटों, गर्मी की लहरों, भारी गिरावट और बाढ़ में वृद्धि। वे सभी कारक कृषि और मत्स्य पालन को नुकसान पहुंचाएंगे या नष्ट करेंगे।

प्रवाल भित्तियों और अल्पाइन घास के मैदानों का विघटन कई पौधों और जानवरों की प्रजातियों को विलुप्त होने के लिए प्रेरित कर सकता है।

पराग के उत्पादन में वृद्धि, वायु प्रदूषण के उच्च स्तर और रोगजनकों और मच्छरों के अनुकूल परिस्थितियों के प्रसार के कारण एलर्जी, अस्थमा और संक्रामक रोग का प्रकोप अधिक आम हो जाएगा।

ग्लोबल वार्मिंग रोकने के उपाय

global warming को रोकने के लिए सबसे पहले हर देश के लोगों को इसके बारे में जागरूकता होनी चाहिए हमें ग्रीन हाउस गैस को कम करने के लिए फ्रिज, AC, वाटर हीटर, वाटर प्यूरीफायर जैसे कार्बन छोड़ने वाले उपकरणों का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। पानी का इस्तेमाल कम करना चाहिए, गाड़ियां हो सके उतनी कम चलाएं और अपने आसपास सफाई रखिए, प्लास्टिक का उपयोग कम करें, पेड़ ना काटे और बिजली का भी हो सके उतना कम इस्तेमाल करें।

दोस्तों यह बात केवल एक इंसान को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को समझनी चाहिए।

Leave a Reply